मंगलवार, 4 नवंबर 2014

आज के प्यार पर कुछ दोहे

समझ न आता आज का,  मुझको सचमुच प्यार।
रोज बदलती लड़कियां, कपड़े -जैसे यार।।
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लंच करे मुसकाय के, छोरी शिव के  साथ।
डिनर कराने के लिए, मिल  जाते प्रभुनाथ।।
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कभी श्याम की कार में, बैठे ठगनी धाय।
बाइक पर घूमे कभी, गिरधर को बहलाय।।
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मौज़ करत हैं छोरियां,  नाजुक  अंग दिखाय।
खाली जेब करा रहीं, अपने जाल फंसाय।।
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बिगड़े छोरा -छोरियां, फैशन में बौराय।
'राज' पूछता आप से, दोषी कौन कहाय।।
-राजकुमार धर द्विवेदी   

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