समझ न आता आज का, मुझको सचमुच प्यार।
रोज बदलती लड़कियां, कपड़े -जैसे यार।।
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लंच करे मुसकाय के, छोरी शिव के साथ।
डिनर कराने के लिए, मिल जाते प्रभुनाथ।।
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कभी श्याम की कार में, बैठे ठगनी धाय।
बाइक पर घूमे कभी, गिरधर को बहलाय।।
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मौज़ करत हैं छोरियां, नाजुक अंग दिखाय।
खाली जेब करा रहीं, अपने जाल फंसाय।।
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बिगड़े छोरा -छोरियां, फैशन में बौराय।
'राज' पूछता आप से, दोषी कौन कहाय।।
-राजकुमार धर द्विवेदी
रोज बदलती लड़कियां, कपड़े -जैसे यार।।
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लंच करे मुसकाय के, छोरी शिव के साथ।
डिनर कराने के लिए, मिल जाते प्रभुनाथ।।
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कभी श्याम की कार में, बैठे ठगनी धाय।
बाइक पर घूमे कभी, गिरधर को बहलाय।।
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मौज़ करत हैं छोरियां, नाजुक अंग दिखाय।
खाली जेब करा रहीं, अपने जाल फंसाय।।
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बिगड़े छोरा -छोरियां, फैशन में बौराय।
'राज' पूछता आप से, दोषी कौन कहाय।।
-राजकुमार धर द्विवेदी
aap logon kee pratikriya ka intazar hai
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