मंगलवार, 4 नवंबर 2014

नेतन से बच रहियो


साधो, नेतन से बच रहियो।
चुगते नेता हीरा -मोती,
जनता भूखी -प्यासी सोती।
चालन में मत फंसियो,
नेतन से बच रहियो।
-----------------------
नहीं खेलते कच्ची गोटी,
नेतन की चमड़ी है मोटी।
थाह न उनकी पइयो,
नेतन से बच रहियो।
............................
उजली धोती,  उजली टोपी,
रोज चाहिए सुंदर गोपी।
रास देख मत हंसियो,
नेतन से बच रहियो।
-------------------------------
जनता की किस्मत है खोटी,
तन पर केवल बची लंगोटी।
कष्ट नहीं अब सहियो,
नेतन से बच रहियो।
-राजकुमार धर द्विवेदी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें