साधो, नेतन से बच रहियो।
चुगते नेता हीरा -मोती,
जनता भूखी -प्यासी सोती।
चालन में मत फंसियो,
नेतन से बच रहियो।
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नहीं खेलते कच्ची गोटी,
नेतन की चमड़ी है मोटी।
थाह न उनकी पइयो,
नेतन से बच रहियो।
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उजली धोती, उजली टोपी,
रोज चाहिए सुंदर गोपी।
रास देख मत हंसियो,
नेतन से बच रहियो।
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जनता की किस्मत है खोटी,
तन पर केवल बची लंगोटी।
कष्ट नहीं अब सहियो,
नेतन से बच रहियो।
-राजकुमार धर द्विवेदी
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