वरदान
दो बालक माता सरस्वती से वरदान मांगने गए। मां ने एक बालक को वर देते हुए कहा, "तू बेहतर शिक्षा प्राप्त कर उच्चाधिकारी बनेगा।"
"और मैं, माता?" दूसरे बालक ने उतावली दिखाई।
" तू अल्प विद्या प्राप्त करेगा।"
"ऐसा क्यों माता? वर देने में भेदभाव क्यों?"
"बेटा, ब्रह्मा जी तेरा भाग्य पहले ही बहुत अच्छा लिख चुके हैं। तू नेता बनेगा। नेता को विद्या की नहीं, तिकड़म की जरूरत होती है। वह उसी से नाम और दाम पाता है। तू जब मंत्री बनेगा तो सारे आईएएस-आईपीएस तुम्हारे सामने सर झुकाए खड़े रहेंगे।" माता सरस्वती ने बालक के कान में यह बात कही तो वह खुशी से उछल पड़ा।
-राजकुमार धर द्विवेदी