सोमवार, 14 दिसंबर 2015

सादर भेंट

लघुकथा

कबाड़ी के ठेले पर जाने- माने लेखक 'निर्गुण' जी का सद्यः प्रकाशित लघुकथा संग्रह 'मैं धूल हूं' देख कर उनके मित्र मोहन चकित रह गए। उन्होंने पुस्तक पलट कर देखी। लिखा था-'जाने-माने समालोचक और प्राध्यापक आदरणीय 'खूसट' जी को सादर भेंट।'
"भाई, तुम्हें यह किताब कहां मिली?"
"का पता कि कहां मिली? वैसे कई दिन से मंत्रियों और साहबों के बंगले से यह कबाड़ खूब निकल रहा है।"
-राजकुमार धर द्विवेदी

बुधवार, 22 अप्रैल 2015










मेरा समन्वित रेडियो नाटक 'होरी मामा'


आकाशवाणी भोपाल से मेरा समन्वित रेडियो नाटक 'होरी मामा' 2 मई, 2015 को सुबह साढ़े 8 बजे प्रसारित होगा। इस नाटक को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी आकाशवाणी केन्द्र रिले करेंगे। नाटक के निर्देशक रायपुर आकाशवाणी केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी और साहित्यकार, नाटककार डॉ. समीर शुक्ल जी हैं। यह नाटक आकाशवाणी रायपुर ने तैयार किया है। आशा है, आप मित्रगण इस नाटक को जरूर सुनेंगे।
-राजकुमार धर द्विवेदी

सोमवार, 5 जनवरी 2015

मेरे नाटक 'पश्चाताप' का प्रसारण

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 मंगलवार (21.10 .2014) रात साढ़े नौ बजे मेरे नाटक 'पश्चाताप' का आकाशवाणी, रायपुर से प्रसारण हुआ। नशे के खिलाफ लिखे गए इस नाटक में मैंने एक ऐसे व्यक्ति को मुख्य पात्र बनाया, जिसने अपने छोटे भाई की मौत के बाद विधवा बहू और उसकी बेटी को घर से निकाल दिया व संपत्ति हड़प ली।  वह खूब नशा करता रहा संपत्ति बेचकर। कुछ साल बाद वह कंगाली की हालत में पहुंच गया। सेहत भी उसकी ख़राब हो गई। मरणासन्न हालत में उसे अपनी करनी पर बेहद पछतावा हुआ। उधर उसके भाई की बेटी अपने मामा के सहयोग से पढ़-लिख कर डॉक्टर बन  गई। उसी बेटी ने सब कुछ भूलकर उसका इलाज कराया। परिवार में मिठास आ गई।  नशेड़ी सुधर गया।
-राजकुमार धर द्विवेदी