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मंगलवार
(21.10 .2014) रात साढ़े नौ बजे मेरे नाटक 'पश्चाताप' का आकाशवाणी, रायपुर
से प्रसारण हुआ। नशे के खिलाफ लिखे गए इस नाटक में मैंने एक ऐसे व्यक्ति को
मुख्य पात्र बनाया, जिसने अपने छोटे भाई की मौत के बाद विधवा बहू और उसकी
बेटी को घर से निकाल दिया व संपत्ति हड़प ली। वह खूब नशा करता रहा संपत्ति
बेचकर। कुछ साल बाद वह कंगाली की हालत में पहुंच गया। सेहत भी उसकी ख़राब हो
गई। मरणासन्न हालत में उसे अपनी करनी पर बेहद पछतावा हुआ। उधर उसके भाई की
बेटी अपने मामा के सहयोग से पढ़-लिख कर डॉक्टर बन गई। उसी बेटी ने सब कुछ
भूलकर उसका इलाज कराया। परिवार में मिठास आ गई। नशेड़ी सुधर गया।
-राजकुमार धर द्विवेदी
-राजकुमार धर द्विवेदी
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