मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

आल्हा छंद


हाहाकार मचा दुनिया में--
हाहाकार मचा दुनिया में, लागो दुर्गा आज सहाय,
काटो खप्पर वाली उसको, जो आतंकी, क्रूर कहाय।
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जग के पालनहार देवता, दो अब अपना चक्र चलाय,
शीश -विहीन दुष्ट आतंकी, जाएं भू पर सभी बिछाय।
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छोड़ो तीर विनय रघुराई, लो तुम अपना धनुष उठाय,
बचे न कोई भी आतंकी, जो निर्मोही खून बहाय।
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नेत्र तीसरा खोलो भोले, भस्म करो पापी को धाय,
बढ़ी पीर, धरती अकुलानी, कष्ट देव अब सहा न जाय।
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भेजो दूत पाक में जल्दी, क्यों चुप बैठे हो यमराज,
आतंकी सब मारे जाएं, राहत पाए देश -समाज।
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दिल में ली क्यों बाड़ लगाय----
बंटवारा क्यों किया देश का, दिल में ली क्यों बाड़ लगाय।
ऐसा करके क्या है पाया, मुझको दो थोडा समझाय।।
छलनी करते जिसका सीना, देते हो तुम शीश उड़ाय।
जिसको मान लिया है बैरी, वह तो अपना भाई आय।।
अमरीका के पांव पूजते, कहते दुश्मन हिंदुस्तान।
कब सुधरोगे आज बताओ, अक्ल कहां है पाकिस्तान।।
सीधी -सच्ची राह मनुज की, छोड़ बना तू क्यों हैवान।
दुनिया के नक़्शे से मिटना, चाह रहा तू क्यों नादान।।
राजकुमार धर द्विवेदी ‘विद्रोही’
 

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