शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

वाह, क्या बात है



 

मित्रो, यह दुर्लभ तस्वीर देखिए। इसमें एक मस्त ग्रामीण बालक के साथ हैं देश के प्रखर पत्रकार श्री निरंजन शर्मा जी। कितनी सरलता, कितनी स्वाभाविकता। उम्र में काफी फर्क, लेकिन दिल एक -सा। दिल, दिल की खबर रखता है, उसे आदमी की सच्ची पहचान होती है, परख होती है। देखिए, तभी तो एक नन्हा बालक उतना ही मस्त है, जितने आदरणीय शर्मा जी। न कोई झेंप, न डर। यह मेरा सौभाग्य है कि श्री शर्मा जी के मार्गदर्शन में मुझे काम करने का मौका मिला है। जब आदरणीय सतना से प्रकाशित 'नेशनल टुडे न्यूज़' के संपादक थे, तब मैं इनका सहयोगी था। एक कुशल लेखक, संपादक और दमदार व्यक्तित्व के साथ ही ऐसे सरल -सहज भी हैं शर्मा जी। छोटे -से -छोटे आदमी से हाथ मिलाते, उसके साथ उठते -बैठते देखा है मैंने इन्हें। स्वाभिमान परशुराम-जैसा है, लेकिन अभिमान तनिक भी नहीं। ऐसी महान शख्सियत को दिल से नमन। वंदन।

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