चाटुकार यदि हो नहीं, सदा सहोगे पीर।
घुटने के नीचे रहो, खाओ पूड़ी -खीर।।
-----------------------------------------------
गद्दारों की वंदना, उनकी ही जयकार।
जो ऐसा करते नहीं, पाते हैं दुत्कार।।
---------------------------------------------
-राजकुमार धर द्विवेदी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें