भुजा बीस, दस शीश थे, बल -विद्या भरपूर।
मिला दशानन खाक में, रहा दंभ से चूर।।
-----------------------------------------------------
द्रोह राम से जो करे, रावण -सी गत होय।
सर्वनाश होकर रहे, कुल में बचे न कोय।।
------------------------------------------------------
अपने देश-समाज में, जगह-जगह लंकेश।
कोई खल के रूप में, कोई मुनि के वेश।।
-----------------------------------------------------
जगत पुकारे आपको, कहां राम हैं आप।
सत्य -सती सिसकें यहां, बढ़ा धरा पर पाप।।
-राजकुमार धर द्विवेदी
मिला दशानन खाक में, रहा दंभ से चूर।।
-----------------------------------------------------
द्रोह राम से जो करे, रावण -सी गत होय।
सर्वनाश होकर रहे, कुल में बचे न कोय।।
------------------------------------------------------
अपने देश-समाज में, जगह-जगह लंकेश।
कोई खल के रूप में, कोई मुनि के वेश।।
-----------------------------------------------------
जगत पुकारे आपको, कहां राम हैं आप।
सत्य -सती सिसकें यहां, बढ़ा धरा पर पाप।।
-राजकुमार धर द्विवेदी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें