नेता राजा आज के, जनता प्रजा कहाय।
नेता सुख हैं भोगते, जनता अश्रु बहाय।।
जनता अश्रु बहाय, पीर पर्वत से भारी,
नहीं प्रगति की आस, बढ़े हैं भ्रष्टाचारी।
पिछड़ गया है देश, नहीं है कोई चेता,
रामराज्य की बात, निरर्थक करते नेता।
-राजकुमार धर द्विवेदी
नेता सुख हैं भोगते, जनता अश्रु बहाय।।
जनता अश्रु बहाय, पीर पर्वत से भारी,
नहीं प्रगति की आस, बढ़े हैं भ्रष्टाचारी।
पिछड़ गया है देश, नहीं है कोई चेता,
रामराज्य की बात, निरर्थक करते नेता।
-राजकुमार धर द्विवेदी
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