रख न दिल में गंदगी
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हमसफ़र कोई न तेरा, तू अकेली ज़िंदगी,
आसरा रख तू खुदा से, कर उसी की बंदगी।
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पांव तेजी से बढ़ा तू, दूर मंज़िल है अभी,
आज हुजरा साफ कर ले, रख न दिल में गंदगी।
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बस कमाना और खाना, है न मतलब मुल्क से,
नेक तू कुछ काम कर ले, सह नहीं शर्मिंदगी।
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दिख रहे शैतान कितने, खो गया है आदमी,
चेत जा तू सो न बंदे, रख सदा संजीदगी।
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खो गए मुखड़े हसीं सब, बस मुखौटे रह गए,
आज चौतरफा यहां है, देख 'राज' दरिंदगी।
- राजकुमार धर द्विवेदी
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हमसफ़र कोई न तेरा, तू अकेली ज़िंदगी,
आसरा रख तू खुदा से, कर उसी की बंदगी।
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पांव तेजी से बढ़ा तू, दूर मंज़िल है अभी,
आज हुजरा साफ कर ले, रख न दिल में गंदगी।
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बस कमाना और खाना, है न मतलब मुल्क से,
नेक तू कुछ काम कर ले, सह नहीं शर्मिंदगी।
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दिख रहे शैतान कितने, खो गया है आदमी,
चेत जा तू सो न बंदे, रख सदा संजीदगी।
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खो गए मुखड़े हसीं सब, बस मुखौटे रह गए,
आज चौतरफा यहां है, देख 'राज' दरिंदगी।
- राजकुमार धर द्विवेदी
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