मंगलवार, 6 मार्च 2018

बघेली चौपाई


हम त तोहका जिउ कस मानी, प्यार -मोहब्बत कुछ न जानी। 
चाहत रहन मिलै बड़ रानी, मिलि गै भैया कुबरी -कानी।
जल्दी से तूं लावा पानी, फेर दुनउ जन दारू छानी। 
साधु-संत कै दाढ़ी तानी, चोरन का हम खूब बखानी।
मात -पिता का मिलै न पानी, पूत कहावै बड़का दानी।
पूत -पतोहू हैं मनमानी, पहुड़े खटिया दुनौ परानी।
करत खुट्टई उमर सिरानी, सीख न पाइन मधुरी बानी।
मरि गें नाना, मरि गै नानी, कउन सुनावै किसा -कहानी।
- राजकुमार धर द्विवेदी

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