मंगलवार, 26 जुलाई 2016

कलेजा फाड़कर निकले कुछ दोहे


मां कहती थी प्यार से, लेना बंगला -कार।
लेकिन पैदल रह गया, बेटा राजकुमार।।
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नेता जी सब खा गए, लेते पड़े डकार।
'बाबा का ठुल्लू' कहें, ले लो राजकुमार।।
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खिले सुमन सब बाग के, 'मुर्दों' के गलहार।
कांटा रहा निकाल है, घायल राजकुमार।।
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खूब बहाने कर लिए, अब तो कर ले प्यार।
'गोरी' तेरी आस में, बैठा राजकुमार।।
-राजकुमार धर द्विवेदी

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